सरिया फैक्ट्री से निकल रहा जहरीला पानी, सिंचाई नहर बनी मौत का कुंआ – पशु-पक्षियों की जान पर संकट, किसानों की फसलें बर्बाद
किच्छा (ऊधम सिंह नगर)।
किच्छा क्षेत्र में स्थित सरिया फैक्ट्री द्वारा कैमिकल युक्त गंदा पानी सीधे सिंचाई नहर में छोड़े जाने से ग्रामीणों का जीवन नरक बन चुका है। किशनपुर और पंचक्की राईट पाहा नहर का पानी अब पूरी तरह प्रदूषित हो गया है। जहरीला रासायनिक पानी पीकर पशु और पक्षियों की मौत हो रही है, वहीं किसानों की मेहनत से उगाई गई फसलें नष्ट होकर बर्बादी की कगार पर पहुँच चुकी हैं।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन लंबे समय से रासायनिक अवशेषों को बिना किसी शोधन के नहर में डाल रहा है। इस नहर के पानी से हजारों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई होती है, जिसमें गेहूं, धान और सब्जियों की फसलें उगाई जाती हैं। जहरीला पानी खेतों में पहुँचने से फसलें सूख रही हैं और उत्पादन पर भारी असर पड़ रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
पशु-पक्षियों की मौत और बीमारियों का खतरा
नहर के पानी को पीने वाले अनेक पशु और पक्षी असमय ही अपनी जान गंवा चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पशुओं में अजीब तरह की बीमारियाँ फैल रही हैं, जिससे दूध उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, इंसानों में भी जलजनित रोगों और त्वचा संबंधी दिक्कतों का खतरा बढ़ने लगा है।
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संस्था का विरोध और चेतावनी
लोक मानव विकास समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष बलदेव सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने कई बार फैक्ट्री प्रबंधन और विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि कैमिकल मिश्रित पानी ने किसानों की जमीन को बंजर बनाने की ओर धकेल दिया है। समिति ने जिला प्रशासन से तुरंत संज्ञान लेने और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है।
बलदेव सिंह ने साफ कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया, तो ग्रामीण और समिति आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ऐसे में समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों में आक्रोश
इस मुद्दे पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण फैक्ट्री प्रबंधन मनमानी कर रहा है।
प्रशासन के लिए गम्भीर सवाल
आखिर कब तक फैक्ट्री द्वारा नहरों और खेतों को जहर पिलाया जाता रहेगा?
किसानों की बर्बाद फसलों और मरते पशुओं का जिम्मेदार कौन होगा?
क्या प्रशासन को ग्रामीणों की जिंदगी और पर्यावरण की चिंता है?
निष्कर्ष
यह मामला न केवल किसानों और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ा है, बल्कि संपूर्ण पर्यावरण, जल स्रोतों और स्वास्थ्य पर संकट है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।









