जंगल सफाई की आड़ में लकड़ी तस्करी का खेल! रुद्रपुर के तेजतर्रार रेंजर ने पकड़ी 3 ट्रैक्टर-ट्रॉली, तीन दिन बाद भी नहीं हुआ खुलासा
जब इस मामले को लेकर जानकारी लेने के लिए रेंजर ललित जोशी से फोन पर कोशिश की तो उन्होंने कहा में तीन -चार दिन से छुट्टी पर गया हूं और अभी भी 4-5 दिन नहीं आऊंगा में अपनी लड़की को पेपर दिलाने गया हूं: मेरी रेंज में कोई ठेकेदार काम नहीं कर रहा मैं खुद ही जंगल सफाई करता हूं
रुद्रपुर। तराई के जंगलों में इन दिनों “जंगल सफाई” के नाम पर लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल चलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ताजा मामला तब सामने आया जब रुद्रपुर के एक तेजतर्रार रेंजर ने उत्तर प्रदेश के एक ठेकेदार की लकड़ी से भरी तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ लीं। हैरानी की बात यह है कि घटना को तीन दिन बीत जाने के बाद भी वन विभाग यह साफ नहीं कर पाया कि लकड़ी आखिर किस रेंज के किस प्लॉट से काटकर लाई गई थी और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार जंगलों में सफाई और वानिकी कार्यों की आड़ में लंबे समय से लकड़ी की अवैध निकासी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के जंगल से एक पत्ता भी नहीं हिलता, फिर सैकड़ों ट्रॉलियां लकड़ी आखिर बाहर कैसे निकल रही हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पकड़ी गई लकड़ी किस रेंज के जंगल से निकली, किस प्लॉट में कटान हुआ और उस क्षेत्र के जिम्मेदार रेंजर व अधिकारियों की भूमिका क्या है। तीन दिन बाद भी विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
सूत्र बताते हैं कि विभाग के एक ऐसे रेंजर पर भी उंगलियां उठ रही हैं जिन्हें DFO और SDO का बेहद करीबी माना जाता है। चर्चा है कि इसी कारण पूरे मामले को दबाने और संबंधित रेंजर को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच सामाजिक संगठन लोक मानव विकास समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष और पर्यावरण प्रेमी बलदेव सिंह ने भी मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि
“हरे-भरे जंगल उत्तराखंड की पहचान हैं। अगर जंगलों की इसी तरह लूट होती रही तो आने वाले समय में ये जंगल रेगिस्तान बन जाएंगे। जंगल लूटने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी लकड़ी तस्करों के साथ मिलकर जंगलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ऐसे अधिकारियों को जल्द ही बेनकाब किया जाएगा।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि तराई के जंगलों से सैकड़ों ट्रॉली लकड़ी पहले ही निकल चुकी है, लेकिन कार्रवाई केवल कुछ ट्रॉलियों तक सीमित रह जाती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वन विभाग असली लकड़ी चोरों तक पहुंचता है या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।
सबसे बड़े सवाल
👉 पकड़ी गई लकड़ी किस रेंज और किस प्लॉट से काटी गई?
👉 लकड़ी के असली मालिक और तस्कर कौन हैं?
👉 क्या किसी रेंजर या अधिकारी की भूमिका की जांच होगी?
👉 क्या जंगलों की लूट पर विभाग लगाम लगा पाएगा?









