रात्रि में बिना नंबर के वाहनों की आवाजाही को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल
भ्रष्टाचार का तहलका ब्यूरो।
रुद्रपुर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग की पीपलपड़ाव वन रेंज में 29 मई की रात्रि कथित रूप से हुई लापरवाही का मामला अब वन विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रकृति प्रेमियों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार सरवती देवी मेमोरियल ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी द्वारा मुख्य वन संरक्षक, नैनीताल को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा गया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि 29 मई की रात्रि लगभग 10 बजे पीपलपड़ाव वन रेंज से करीब 10 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एवं कई मोटरसाइकिलें निकलीं, जिनमें से अधिकांश वाहनों पर पंजीकरण संख्या अंकित नहीं थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि इनमें शामिल अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश के निवासी थे।
शिकायत में कहा गया है कि रात्रिकाल में इतनी बड़ी संख्या में भारी एवं हल्के वाहनों की आवाजाही से जंगल की शांति भंग हुई तथा वन्यजीवों और मानव सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता था। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रात्रि के समय वन क्षेत्र में वन्यजीवों का विचरण अधिक रहता है, ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही और शोर-शराबा वन संरक्षण के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा उक्त वाहनों को रात्रि में वन क्षेत्र से गुजरने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई। उनका कहना है कि यदि आवश्यक था तो वाहनों को सुबह तक रोका जा सकता था। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।









