प्रशासन की नाकामी – सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के हौसले बुलंदनोटिस देकर इतिश्री, कार्रवाई से बचते अफसर
जसपुर (उधम सिंह नगर)। जसपुर क्षेत्र में सरकारी जमीनों और तालाबों पर दिन-प्रतिदिन बढ़ते अतिक्रमण ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत चुनावों के शासनादेश में साफ लिखा गया है कि यदि किसी व्यक्ति या उसके परिवार का कब्जा सरकारी भूमि पर पाया गया तो उसका नामांकन निरस्त होगा, लेकिन यहां हो रहा बिल्कुल उल्टा। अफसर कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ा रहे हैं।
पूर्व प्रधान से लेकर मौजूदा प्रधान तक पर आरोप
निज़ामगढ़ मनोरथपुर फर्स्ट गांव में पूर्व प्रधान पर प्राथमिक विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण करने का आरोप है। इस संबंध में कई बार शिकायतें प्रशासन तक पहुंचीं, यहां तक कि सीएम पोर्टल पर भी दर्ज कराई गईं, लेकिन नतीजा वही—सिर्फ नोटिस और फिर चुप्पी।
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इसी गांव के मौजूदा ग्राम प्रधान पर भी तालाब की सरकारी भूमि पर कब्जा कर निर्माण करने की चर्चा जोरों पर है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिम्मेदार ही कानून तोड़ेंगे, तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जाए।
पैसे के बल पर तालाब की जमीन हड़पी
भोगपुर ग्राम पंचायत में सात एकड़ के तालाब की भूमि को कथित तौर पर वर्ग 3 से हटाकर पैसे के बल पर वर्ग 4 में दर्ज करवा लिया गया। इतना ही नहीं, तालाब की भूमि पर मिट्टी भरान कर उसे समतल कर निजी इस्तेमाल के लिए तैयार कर लिया गया। शिक्षा विभाग ने स्कूल की जमीन खाली कराने को नोटिस जारी किया था, लेकिन ग्राम प्रधान पर ही उस जमीन पर कब्जा करने के आरोप लग रहे हैं।
वीरपुरी में रास्ते पर मकान
ग्राम पंचायत वीरपुरी में 40 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते पर एक व्यक्ति ने मकान खड़ा कर दिया। शिकायत के बावजूद प्रशासन ने दबंगई और धनबल के आगे घुटने टेक दिए और ग्रामीणों की बात को अनसुना कर दिया।
जनता आक्रोशित, प्रशासन पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन खुली छूट देकर अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या वजह है कि शिकायतों और शासनादेशों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? क्या अफसर सिर्फ अपनी जेब भरने और जनता को उल्लू बनाने के लिए बैठे हैं?
साफ संदेश – जसपुर क्षेत्र में सरकारी जमीनों की लूट-खसोट रोकने के बजाय प्रशासन खुद अतिक्रमणकारियों का संरक्षक बन गया है।









