रेलवे भूमि खाली कराने के निर्देश, पात्र परिवारों को पीएम आवास व छह माह तक भत्ता देने का आदेश
भ्रष्टाचार का तहलका ब्यूरो, हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा इलाके में रेलवे भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने बड़ा और संतुलित फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है और उसका उपयोग करने का पूर्ण अधिकार रेलवे को है। किसी भी व्यक्ति या समूह को यह अधिकार नहीं है कि वह उसी स्थान पर बसाए रखने की मांग करे।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अतिक्रमण हटाया जाना अनिवार्य है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ईद के बाद पुनर्वास प्रक्रिया शुरू की जाए और प्रभावित परिवारों की पहले समुचित पहचान की जाए।
पात्र परिवारों को मिलेगा पुनर्वास और आर्थिक सहायता
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे को संयुक्त रूप से निर्देशित किया है कि जिन परिवारों को हटाया जाएगा, उन्हें पात्रता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराया जाए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक पात्र परिवार को छह महीने तक प्रतिमाह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी, ताकि वे अस्थायी रूप से अपने जीवनयापन की व्यवस्था कर सकें।
अदालत ने यह भी कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी की जाए तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या मानवीय संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा पिछले कई वर्षों से विवाद का विषय बना हुआ था। इस संबंध में विभिन्न याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह अंतिम आदेश पारित किया।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—सर्वेक्षण कर वास्तविक प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करना और पुनर्वास की प्रक्रिया को समयबद्ध ढंग से लागू करना।
प्रशासन की तैयारियां शुरू
सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन ने संभावित विस्थापन को देखते हुए प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुनर्वास शिविरों की स्थापना, पात्रता निर्धारण और सहायता वितरण की रूपरेखा पर मंथन किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद साफ हो गया है कि बनभूलपुरा में रेलवे भूमि पर बना अतिक्रमण अब हटना तय है, लेकिन साथ ही प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था और आर्थिक सहारा भी दिया जाएगा।









