हल्द्वानी। हर वर्ष 14 सितम्बर को पूरे देश में हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें हमारी मातृभाषा हिंदी के महत्व और गौरव की याद दिलाता है। वर्ष 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा प्रदान किया था।
हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और भावनाओं की आत्मा है। यह भाषा हमें एक सूत्र में पिरोकर विभिन्न धर्म, क्षेत्र, जाति, वर्ग और समुदायों की विविधता में एकता का प्रतीक बनाती है। विश्व स्तर पर करोड़ों लोग हिंदी बोलते और समझते हैं, जिससे हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में स्थान रखती है।
डॉ. रेनूशरण ने कहा कि आज अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं का महत्व अपनी जगह है, लेकिन अपनी पहचान और जड़ों से जुड़े रहने का सबसे सशक्त माध्यम हमारी मातृभाषा ही है। यदि हम अपने घर, शिक्षा और कार्यक्षेत्र में हिंदी का प्रयोग बढ़ाएँगे, तो यह न केवल भाषा की शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी गौरव का अनुभव कराएगा।
उन्होंने कहा कि हिंदी हमें जोड़ने वाली भाषा है और इसे सम्मान देना हर भारतीय का कर्तव्य है। अपने विचारों को विराम देते हुए डॉ. रेनूशरण ने कहा – “हमारा मान, सम्मान, अभिमान है हिंदी।”
इस अवसर पर उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया कि इस हिंदी दिवस पर हम संकल्प लें कि हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे और इसे केवल एक भाषा नहीं, बल्कि अपनी आत्मा और अस्मिता का प्रतीक मानकर सम्मान देंगे।









