
नगला में अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी — शासन ने बनाई उच्चस्तरीय समिति, दीपक रावत ने किया स्थलीय निरीक्षण
पंतनगर। नगर पालिका नगला क्षेत्र में अतिक्रमण से प्रभावित भूमि के स्वत्व निर्धारण और चिन्हीकरण के लिए शासन स्तर पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इसका मकसद क्षेत्र में फैले भूमि विवादों का निष्पक्ष समाधान कर पारदर्शी तरीके से वास्तविक स्वामित्व तय करना है।
समिति की अध्यक्षता कुमाऊँ मण्डल के आयुक्त दीपक रावत कर रहे हैं, जबकि जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर, प्रभागीय वनाधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता को सदस्य बनाया गया है।
👉 बुधवार को मण्डलायुक्त दीपक रावत के नेतृत्व में समिति ने नगला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अतिक्रमण प्रभावित हिस्सों का गहन परीक्षण हुआ और पुराने अभिलेखों व नोटिसों की समीक्षा की गई।
मण्डलायुक्त ने बताया कि शासन की मंशा है कि नगला क्षेत्र में भूमि से जुड़े सभी विवादों का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण किया जाए। निरीक्षण में यह तथ्य सामने आए कि क्षेत्र में वन विभाग की भूमि, लोक निर्माण विभाग की सड़क और तराई स्टेट फार्म की पुरानी जमीन के बीच स्वामित्व को लेकर कई बिंदु स्पष्ट होने बाकी हैं।
उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी नोटिसों में सड़कों की चौड़ाई दोनों ओर 50-50 फीट दर्शाई गई थी। अब उसी आधार पर सड़कों के दोनों ओर चिन्हांकन कर अतिक्रमण की पहचान की जाएगी। जिन निर्माणों पर सड़क सीमा का अतिक्रमण पाया जाएगा, उन्हें हटाने के निर्देश जारी होंगे।
मण्डलायुक्त रावत ने कहा कि यदि ज़रूरत पड़ी तो Survey of India से विस्तृत सर्वे भी कराया जाएगा, ताकि वन विभाग की सीमा और सड़क चौड़ाई को लेकर कोई भ्रम न रहे। हालांकि, त्यौहारों को देखते हुए चिन्हांकन की कार्रवाई त्यौहारों के बाद शुरू की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, प्रभागीय वनाधिकारी यू.सी. तिवारी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र, उपजिलाधिकारी मनीष बिष्ट, तहसीलदार गिरीश त्रिपाठी, समेत अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।









