विशेष रिपोर्ट: बलदेव सिंह, भ्रष्टाचार का तहलका न्यूज़।
किच्छा। ऊधम सिंह नगर जिले में कानून व्यवस्था की जड़ें कितनी खोखली हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता सबूत है— जिले की सड़कों पर खुलेआम हुकूमत चला रहे ओवरलोड भूसी ट्रक और डग्गामार वाहन। राष्ट्रीय राजमार्ग हो या राज्य राजमार्ग, हर रूट पर इन वाहनों की बेलगाम रफ्तार और नियमों की धज्जियाँ उड़ाती चाल ने परिवहन विभाग, पुलिस, सीपीयू और पुलभट्टा थाना की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलभट्टा थाना को खुली चुनौती देते बेख़ौफ ओवरलोड वाहन, आरटीओ चेक पोस्ट के नाक के नीचे फल-फूल रहा ‘ओवरलोड हब’
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है किच्छा पुलभट्टा थाना क्षेत्र की आरटीओ चेक पोस्ट सतुईया से महज कुछ कदम की दूरी पर ओवर हाइट भूसी ट्रकों ने बाकायदा अपना “स्थाई ठिकाना” बना लिया है।
● रोजाना शाम होते ही यूपी से आने वाले भूसी ट्रक बड़ी आसानी से यहां लैंड होते हैं।
● रात के अंधेरे में ये ट्रक…
→ पुलभट्टा थाना को खुलेआम चुनौती देते हुए
→ आरटीओ चेक पोस्ट के दरवाज़े के सामने से गुजरते हुए
→ सीपीयू व रुद्रपुर पुलिस चौकियों को चकमा देते हुए
…सीधे रुद्रपुर सिडकुल के लिए टेक-ऑफ कर जाते हैं।
ऐसा लगता है मानो इन भूसी ट्रकों को किसी अदृश्य ‘ग्रीन कॉरिडोर’ की सुविधा प्राप्त हो, जहाँ नियम सिर्फ नाम के लिए हैं और कार्रवाई कहीं दूर खो चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभार दिखने वाली कार्रवाई सिर्फ दिखावा होती है—असली कारोबार रात के समय जमकर चलता है।
क्या विभाग की आँखों पर पट्टी है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
➤ चेकपोस्ट के इतनी नज़दीक से रोजाना गुजर रहे ओवरलोड वाहन किसकी अनुमति से गुजर रहे हैं?
➤ थाना, चौकी और आरटीओ विभाग को क्या इनके मार्ग की जानकारी नहीं?
➤ या फिर यह सब ‘सबकी जानकारी’ में ही हो रहा है?
सूत्र बताते हैं कि कुछ ट्रकों के पास न तो वैध ऊँचाई है, न फिटनेस, न ओवरहाइट क्लियरेंस, न ओवरलोडिंग की जांच—और न ही किसी अधिकारी का डर।
डग्गामार वाहनों की मनमानी—निर्मम खेल जारी, ग्गामार वाहन भी किसी से कम नहीं।
● किच्छा–रुद्रपुर
● किच्छा–बहेड़ी
● रुद्रपुर—सिडकुल—आसपास के उपनगर
हर रूट पर बिना परमिट, बिना स्टॉपेज, बिना सुरक्षा मानकों के ये वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं।
इन वाहनों में क्षमता से अधिक यात्री भरे जाते हैं, और हादसे होने पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी जाती है। यात्री सुरक्षा भगवान भरोसे है।
आमजन परेशान, अधिकारी बेखबर?
स्थानीय लोगों का दर्द यह है कि—
“अगर आम आदमी दो पहिया पर बिना हेलमेट पकड़ा जाए तो तुरंत चालान, लेकिन ओवरलोड भूसी ट्रक जो खुद मौत के साए की तरह चलते हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं!”
बड़ी विडंबना यह है कि पुलिस की कड़ी कार्रवाई अक्सर केवल दोपहिया चालकों पर ही दिखाई देती है, जबकि असली खतरा सड़कों पर चल रहे ये भारी-भरकम नियम तोड़ू वाहन हैं।
क्या विभागीय गठजोड़ की बू आ रही है?
कई परिवहन विशेषज्ञ मानते हैं कि इतने बड़े स्तर पर ओवरलोडिंग—
● बिना संरक्षण,
● बिना सेटिंग,
● बिना मिलीभगत
कभी संभव नहीं हो सकती।
सवाल यह भी है कि अगर एक-दो दिन नहीं, बल्कि रोजाना यह सब हो रहा है तो क्या विभाग की नींद इतनी गहरी है?
इससे जिले को बड़ा खतरा
1. सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी
2. पुलों और सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है
3. ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा दोगुना
4. करोड़ों का राजस्व नुकसान
5. कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा धब्बा
अब यह रिपोर्ट सामने आने के बाद जिले के आला अधिकारियों पर दबाव बढ़ना तय है कि—
✔ आखिर इतनी खुली मनमानी कैसे हो रही है?
✔ चेकपोस्ट और थाना क्षेत्र में गाड़ियों की ऐसी निर्बाध आवाजाही पर कार्रवाई क्यों नहीं?
✔ क्या सिडकुल तक का पूरा रास्ता कार्रवाई-मुक्त किया गया है?
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह सवाल सरकार और विभाग दोनों की छवि पर बड़ा प्रहार करेंगे।
ऊधम सिंह नगर में ओवरलोड और डग्गामार वाहनों का आतंक अब कानून-व्यवस्था की असली परीक्षा बन चुका है। पुलभट्टा थाना, आरटीओ विभाग, सीपीयू और पुलिस चौकियों की चुप्पी जनता को बेचैन कर रही है।
अब जनता बस यही पूछ रही है—
“कानून किसके लिए है? आम आदमी के लिए या ओवरलोड माफिया के लिए?”









