डॉ. रेनू शरण के नेतृत्व में स्वच्छता, संस्कार और सशक्तिकरण का अभियान — विजयादशमी पर दिया सामाजिक परिवर्तन का संदेश
हल्द्वानी। सरस्वती देवी मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष डॉ. रेनू शरण के नेतृत्व में 16 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक देशभर में महिला सशक्तिकरण, बाल विकास एवं सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से भव्य आयोजन किए गए। चोपला चौराहा स्थित अस्थायी कार्यालय में आयोजित इस विशेष अभियान में स्वच्छता, पौधारोपण, धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामाजिक एकजुटता का संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम के शुभारंभ में डॉ. रेनू शरण ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और मां भारती की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके पश्चात देश के विभिन्न हिस्सों में स्वच्छता अभियान चलाए गए, पौधे लगाए गए, और रामचरितमानस के प्रसंगों को नाटकीय शैली में प्रस्तुत कर सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया गया।
इस अभियान के अंतर्गत कन्या पूजन, शस्त्र पूजन, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और डांडिया उत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों को मंगल टीका, उपहार, दक्षिणा व प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरण हुआ।
इस अवसर पर डॉ. रेनू शरण ने विजयादशमी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्षगांठ पर सभी को बधाई दी और कहा—
“भारत में नारी को कोमलता, क्षमाशीलता और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति माना गया है। लेकिन जब अन्याय होता है तो वही नारी रणचंडी बनकर अधर्म का संहार भी करती है।”
उन्होंने धर्मग्रंथों के उद्धरण देते हुए बताया कि नारी ही घर की लक्ष्मी, माँ अन्नपूर्णा और शक्ति है। मनुस्मृति में भी नारी को गृह की शोभा व सम्मान का प्रतीक बताया गया है।
अपने संबोधन में डॉ. शरण ने समाज में व्याप्त विकृत मानसिकता पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा—
“कुछ लोग आज भी नारी को भोग्या या सेविका समझते हैं। लेकिन नारी की सहनशीलता को कमजोरी समझने की भूल न करें। जब नारी का हृदय प्रेम से खाली हो जाता है, तब वह महाकाली बनकर अन्याय का अंत करती है।”
उन्होंने पुरुषों से आह्वान किया कि वे नारी के कोमल मन का सम्मान करें और उसे उसका अधिकार दें — क्योंकि नारी को सशक्त बनाना समाज को सशक्त बनाना है।
इस कार्यक्रम में अहाना, तन्नू शुक्ला, मोनिका भारती, राधिका, रेनू शुक्ला, दीपाकुढाई, संतोषी मिश्रा और अहमदाबाद से विशेष रूप से आईं विध्याबेन तौरानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं ट्रस्ट सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम की सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि जब महिला नेतृत्व आगे आता है, तो सामाजिक परिवर्तन की नई लहर उठती है।









