पेपर लीक से तबाह सपने — युवाओं की मेहनत पर सत्ता की साज़िश का पानी
भ्रष्टाचार का तहलका: न्यूज़ नेटवर्क
रूद्रपर। देशभर में एक के बाद एक सामने आ रहे पेपर लीक कांडों ने करोड़ों मेहनती युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। उत्तराखंड में हुआ UKSSSC पेपर लीक इसका ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण है। लाखों अभ्यर्थियों ने दिन-रात मेहनत की, सालों की तैयारी में अपनी ज़िंदगी झोंक दी — लेकिन कुछ भ्रष्ट तंत्र और सत्ताधारी खेल ने इस मेहनत को मिट्टी में मिला दिया।
UKSSSC पेपर लीक: युवाओं की उम्मीदों पर बड़ा हमला
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में हुआ बड़ा पेपर लीक घोटाला सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं की व्यथा की झलक है। युवाओं का आरोप है कि पेपर माफिया और सत्ता में बैठे रसूखदारों की मिलीभगत से प्रतियोगी परीक्षाओं को लूट का ज़रिया बना दिया गया है।
पेपर चोर, गद्दी छोड़– सड़कों पर उतरे युवा
प्रदेश से लेकर राजधानी दिल्ली तक युवाओं में ग़ुस्सा उबाल पर है। हज़ारों की तादाद में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी कर रहे हैं —
👉 “पेपर चोर, गद्दी छोड़!”
👉 “मेहनत हमारी, नौकरी तुम्हारी — ये नहीं चलेगा!”
युवाओं का कहना है कि जब तक पेपर लीक माफिया और उनके राजनीतिक सरगनाओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।
मांग: मज़बूत व पारदर्शी सिस्टम बने
युवा संगठनों और छात्र नेताओं की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया में डिजिटल सिक्योरिटी, पारदर्शी निगरानी तंत्र और सख़्त कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हो सकें। लेकिन केंद्र सरकार पर आरोप है कि वह युवाओं की समस्याओं पर आंखें मूंदे बैठी है।
बेरोज़गारी – वोट चोरी का खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोज़गारी की बढ़ती समस्या अब सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हेराफेरी से भी जुड़ी है। पेपर माफिया जानते हैं कि अगर युवाओं को रोजगार न भी मिले तो वे चुनाव में वोट चोरी व धांधली से सत्ता में बने रहेंगे।
यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, न्याय और लोकतंत्र की है
यह आंदोलन अब नौकरियों की मांग से आगे बढ़ चुका है। यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे और युवाओं के भविष्य की रक्षा की लड़ाई बन गया है।
देश के हर कोने से आवाज़ उठ रही है —
👉 “हम मेहनती हैं, चुप नहीं बैठेंगे!”
👉 “न्याय चाहिए, जुमले नहीं!”









