किच्छा | संवाददाता: दिलीप अरोरा
किच्छा से रुद्रपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-74 इन दिनों यातायात नियमों की खुलेआम हत्या का गवाह बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन हजारों मासूम ज़िंदगियां गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण मौत के मुंह में धकेली जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।
हाइवे पर चलने वाले सवारी ऑटो यातायात नियमों को ठेंगा दिखाते हुए 12 से 15 सवारियां ठूंस-ठूंस कर दौड़ रहे हैं। ड्राइवर की सीट पर जहाँ केवल चालक बैठ सकता है, वहाँ तीन सवार, भीतर आठ और पीछे चार सवारियां—यह न सिर्फ नियमों की धज्जियाँ हैं बल्कि सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है।
सवालों के घेरे में जिला मुख्यालय
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल उधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय मार्ग पर चल रहा है, जहाँ से जिले के तमाम शीर्ष अधिकारियों का रोज़ाना आना-जाना होता है।
किच्छा कोतवाली, लालपुर पुलिस चौकी, सीपीयू और परिवहन विभाग की मौजूदगी के बावजूद अगर डग्गामारी यूँ ही फल-फूल रही है, तो सवाल उठना लाज़मी है—
आख़िर किसकी शह पर चल रहा है यह मौत का कारोबार?
कार्रवाई सिर्फ दोपहिया पर, ऑटो बेखौफ
यातायात चेकिंग के नाम पर अक्सर दोपहिया वाहन चालकों को ही निशाना बनाया जाता है, जबकि हाइवे पर खुलेआम नियम तोड़ रहे सवारी वाहन बेखौफ दौड़ते रहते हैं।
यह दोहरा रवैया जनता के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर रहा है।
हज़ारों हादसे, फिर भी नहीं खुली नींद
बीते कुछ वर्षों में उधम सिंह नगर की सड़कों पर सैकड़ों दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, कई परिवार उजड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद डग्गामारी पर लगाम लगाने में पुलिस, सीपीयू और परिवहन विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
जनता पूछ रही है—कब जागेंगे जिम्मेदार?
जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, क्या तब तक यही लापरवाही चलती रहेगी?
एनएच-74 पर दौड़ती ये ओवरलोड ऑटो किसी बड़े हादसे का खुला न्योता हैं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागते हैं या फिर किसी और मासूम की जान जाने का इंतज़ार किया जा रहा है।









