ऊधम सिंह नगर में फर्जी अस्पतालों का जाल — लापरवाह प्रशासन, खतरे में जनता की जान
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर एक खतरनाक खेल चल रहा है। यहाँ दर्जनों फर्जी अस्पताल और क्लीनिक बिना मान्यता और मेडिकल मानकों के खुलेआम संचालित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें इलाज करने वाले कई तथाकथित “डॉक्टर” न तो डिग्रीधारी हैं, न प्रशिक्षित, और न ही इलाज की वैध अनुमति रखते हैं।
प्रशासन की नींद कब टूटेगी
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इन फर्जी अस्पतालों की हकीकत मालूम है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ काग़ज़ी खानापूरी तक ही सीमित रहती है। छापेमारी के नाम पर कुछ दिन की हलचल होती है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर कौन सी ताकतें इन मौत के सौदागरों को संरक्षण दे रही हैं?
हॉस्पिटल बने हादसों के अड्डे
इन अस्पतालों में न तो प्रशिक्षित स्टाफ है, न आपातकालीन सुविधाएं। बिना डिग्री वाले नर्स और तकनीशियन भर्ती कर लिए जाते हैं, जो अनुभवहीन हैं और मरीजों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करते हैं।
👉 गलत दवाइयों से मरीज की हालत बिगड़ना
👉 ऑपरेशन में लापरवाही से मौत
👉 जांच रिपोर्ट में हेराफेरी कर गलत इलाज
👉 हादसों की लंबी लिस्ट दबा दी जाती है
जनता की सेहत से खुला खिलवाड़
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी जमा-पूंजी लगाकर इलाज करवाने आते हैं, लेकिन मुनाफाखोरी के इस खेल में कई लोग कर्ज में डूब जाते हैं और अपनों को खो देते हैं। यहां इलाज नहीं, बल्कि मौत का सौदा बेचा जा रहा है।
जवाबदेही से भागता प्रशासन
जब स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर है, तो इन हादसों के लिए जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती? दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? सूत्रों का कहना है कि जब तक सख्त कानून, नियमित निरीक्षण और कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऊधम सिंह नगर में फर्जी अस्पतालों का यह काला धंधा बंद नहीं होगा।









