भ्रष्टाचार का तहलका, संवाददाता। सितारगंज। जंगलों में एक बार फिर कानून को खुली चुनौती दी गई। रनसाली आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर खनन माफियाओं ने सुनियोजित हमला कर दिया। दबंगों ने वन दरोगा नंद किशोर पांडे को ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलने का प्रयास किया, वर्दी फाड़ दी और मोबाइल छीनकर फरार हो गए। घटना ने वन विभाग और पुलिस प्रशासन की सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवैध खनन पकड़ते ही बौखलाए माफिया
वन दरोगा नंद किशोर पांडे, वन आरक्षी शक्ति सिंह, वन बीट अधिकारी भूपेंद्र कुमार और रोपण रक्षक सूरज सिंह कार्की नियमित गश्त पर रनसाली कक्ष संख्या-1 आरक्षित वन क्षेत्र पहुंचे थे। कैलाश नदी क्षेत्र में तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली में अवैध रूप से उपखनिज भरा जा रहा था। वन कर्मियों ने जब वैध दस्तावेज मांगे तो मौके पर मौजूद लोग कोई कागजात नहीं दिखा सके। टीम ने वाहन रेंज कार्यालय ले जाने की कार्रवाई शुरू की, तभी खनन में लिप्त दबंगों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश, वर्दी फाड़ी
आरोप है कि साधूनगर निवासी राजकुमार, उसका पुत्र राजा समेत चार-पांच अन्य लोगों ने वन कर्मियों के साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान लाल रंग के ट्रैक्टर से वन दरोगा को कुचलने का प्रयास किया गया। उन्हें गिराकर वर्दी फाड़ दी गई। हंगामे के बीच वन दरोगा का मोबाइल फोन भी गायब हो गया, जिसमें विभागीय महत्वपूर्ण अभिलेख मौजूद थे। जान से मारने की धमकी देते हुए आरोपी ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाकर फरार हो गए। पीड़ित वन दरोगा के अनुसार, आरोपियों ने झूठे मुकदमों में फंसाने, एससी/एसटी एक्ट लगाने और सूचना के अधिकार व सीएम पोर्टल पर शिकायत कर परेशान करने की धमकी भी दी। किसी तरह वन कर्मियों ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई और डायल 112 पर सूचना दी। पुलिस ने राजकुमार पुत्र स्व. कृष्ण, राजा पुत्र राजकुमार सहित एक अन्य नामजद व दो अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अवैध खनन में प्रयुक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली (यूए04डी-4935) समेत अन्य बिना नंबर वाहनों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारी भूपेंद्र सिंह धोनी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या जंगलों में कानून का राज कायम होगा या खनन माफियाओं की ट्रैक्टर-ट्रॉली यूं ही प्रशासन को चुनौती देती रहेंगी, रनसाली की यह घटना केवल एक हमले की कहानी नहीं, बल्कि अवैध खनन के बढ़ते दुस्साहस और तंत्र की परीक्षा का प्रतीक बन गई है।









