परिवहन विभाग की लापरवाही से सड़कें बनीं मौत का रास्ता
बलदेव सिंह, भ्रष्टाचार का तहलका न्यूज़। ऊधम सिंह नगर जिले की सितारगंज एवं रुद्रपुर तहसील क्षेत्र में ओवर-हाइट एवं ओवर-लोड भूसी व बकास से लदे ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का संचालन पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है। हालात ऐसे हैं कि हाईवे से लेकर शहरी मार्गों तक दिन-रात सैकड़ों भारी वाहन क्षमता से कई गुना अधिक भार और खतरनाक ऊँचाई लेकर फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन परिवहन विभाग (RTO) के सचल दल अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
दावे बड़े, हकीकत शून्य
जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। भूसी व बकास की मशरूम शेव से भरे ट्रक ट्रैक्टर ट्रालिया खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए हाईवे पार कर रहे हैं। न कोई नियमित चेकिंग, न ही कोई ठोस कार्रवाई—परिणाम स्वरूप सड़क दुर्घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है।
न चेकिंग, न चालान—सब ‘सेफ’
रुद्रपुर व सितारगंज क्षेत्र में परिवहन विभाग के सचल दल द्वारा ओवर-हाइट व ओवर-लोड वाहनों की नियमित जांच नहीं की जा रही। सितारगंज व रुद्रपुर हाईवे पर बड़े-बड़े ट्रक व ट्रेक्टर-ट्रॉलिया बिना रोक-टोक गुजर रही हैं। बीते कई महीनों में किसी बड़ी कार्रवाई या भारी चालान की कोई सूचना सामने नहीं आई। विभागीय ढिलाई के चलते दर्जनों दुर्घटनाएँ, जनहानि और संपत्ति का नुकसान हो चुका है।
जनहित पर भारी विभागीय लापरवाही
जिन अधिकारियों पर सड़क सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और जनजीवन की रक्षा की जिम्मेदारी है, वही अपनी भूमिका निभाने में असफल साबित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में रुद्रपुर एवं सितारगंज में वर्तमान सचल दल अधिकारियों का बने रहना जनहित में उचित नहीं माना जा रहा।
उठी कार्यवाही की मांग
1. रुद्रपुर व सितारगंज तहसील क्षेत्र में ओवर-हाइट व ओवर-लोड वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाए।
2. परिवहन विभाग के सचल दल अधिकारियों की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
3. जनहित व प्रशासनिक पारदर्शिता को देखते हुए वर्तमान सचल दल अधिकारियों का तत्काल ट्रांसफर किया जाए।
4. आगे से विभागीय कार्यवाही की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
सवालों के घेरे में RTO
सवाल यह है कि जब दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं, लोग जान गंवा रहे हैं, तो आखिर परिवहन विभाग किसके इशारे पर आंखें मूंदे बैठा है? क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सितारगंज और रुद्रपुर की सड़कें यूँ ही हादसों का कब्रिस्तान बनती रहेंगी।









