तराई केंद्रीय वन प्रभाग, रुद्रपुर अन्तर्गत विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां देशभर में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए जा रहे थे, वहीं तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर की गदगदिया वन रेंज से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। आरोप है कि रेंज के प्लॉट संख्या-5 में दिनदहाड़े चार पेड़ों को आरी से काट दिया गया, जिससे वन प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार गदगदिया वन रेंज के प्लॉट संख्या-5 में सफाई कार्य की आड़ में चार पेड़ों को काटे जाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि पेड़ों को काटने के बाद उनकी लकड़ी के टुकड़े कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से बाहर ले जाने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि घटना स्थल गदगदिया क्षेत्राधिकारी कार्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
कार्यालय के पास हुई घटना, फिर भी अधिकारियों को नहीं लगी भनक
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी वाले क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है। मामले में जब गदगदिया रेंज के रेंजर से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
इस बयान के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पर्यावरण दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
वन संपदा और वन्यजीव सुरक्षा पर चिंता
पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि वन क्षेत्र में दिनदहाड़े पेड़ों की कटाई हो जाए और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों तक न पहुंचे तो यह वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि ऐसी घटनाएं वन माफियाओं और अवैध कटान करने वालों के हौसले बढ़ा सकती हैं।
वन प्रेमियों ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र के वन प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठाई जा रही है।
वन प्रेमियों का कहना है कि यदि पर्यावरण दिवस पर ही पेड़ों की कटाई जैसी घटनाएं होती हैं तो यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज और शासन के प्रयासों पर भी प्रश्न खड़े करता है।
अब सबकी नजर विभागीय कार्रवाई पर
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग और उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।









