बलदेव सिंह की रिपोर्ट….
रुद्रपुर। किच्छा विधानसभा क्षेत्र में रात का सन्नाटा अब खामोशी नहीं, बल्कि एक खतरनाक सच्चाई को छुपाए बैठा है। जैसे ही घड़ी आधी रात पार करती है, सड़कों पर शुरू हो जाता है एक ऐसा खेल, जो कानून, सुरक्षा और परिवहन प्रशासन—तीनों को खुली चुनौती देता नजर आता है। किच्छा में रात के अंधेरे में भूसी, लकड़ी से लदे ओवरहाइट और ओवरलोड ट्रकों व ट्रैकटर ट्रालियों के काफिले सड़कों पर दौड़ते हैं, मानो नियमों को कुचलने का लाइसेंस लेकर निकले हों। इन ट्रकों का आकार और भार इतना अधिक होता है कि वे किसी भी वक्त संतुलन खोकर बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं स्थानीय सूत्रो के अनुसार, यह पूरा खेल रात 11 बजे के बाद शुरू होता है और सुबह तड़के 5 बजे तक चलता रहता है। दर्जनों की संख्या में ट्रक एक के पीछे एक निकलते हैं, जिनमें लकड़ी व भूसी का इतना अधिक लोड होता है कि ट्रकों की ऊंचाई सामान्य सीमा से कहीं ज्यादा दिखाई देती है। हैरानी की बात यह है कि ये ट्रक बिना किसी रोक-टोक के मुख्य सड़कों और शहर के बीचों-बीच से गुजरते हैं, लेकिन कहीं भी कोई चेकिंग या कार्रवाई नजर नहीं आती।
नियमों का मजाक या ‘सेटिंग’ का खेल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन ट्रकों और ट्रेक्टर ट्रालियो को रोकने वाला कौन है — और क्यों नहीं रोका जा रहा क्या परिवहन विभाग, पुलिस और संबंधित अधिकारी इस पूरे खेल से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं सूत्रों की मानें तो इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक कथित “एंट्री सिस्टम” काम कर रहा है। यानी कुछ तय रकम के बदले इन ट्रकों को खुली छूट मिल जाती है। यही वजह है कि न तो इन्हें चेक किया जाता है और न ही ओवरलोडिंग पर कोई चालान या जब्ती की कार्रवाई होती है। सड़क सुरक्षा के नाम पर सरकार करोड़ों रूपये खर्च करती है लेकिन हकीकत कुछ और ही व्यान कर रही है जनता का सड़क पर चलना मुश्किल हो रहा है हर पल मंडरा रहा है बड़ा खतरा कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ये ओवरलोड व ओवर हाइट ट्रक और ट्रैकटर ट्रालिया न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि सड़क पर चलने वाले आम लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। ट्रकों और ट्रेक्टर के असंतुलित भार के कारण कभी भी पलट सकता है ब्रेक फेल या कंट्रोल बिगड़ने का खतरा बना रहता है रात के अंधेरे में विजिबिलिटी कम होने से हादसे की संभावना और बढ़ जाती है स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार ये ट्रक तेज रफ्तार में गांवों और कस्बों से गुजरते हैं, जिससे लोग दहशत में रहते हैं। किच्छा क्षेत्र में ओवर लोडिंग को लेकर क्षेत्र के समाज सेवियों और जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में गड़बड़ी जरूर है।
अब सवाल उठता है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
क्या परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रहा है?
क्या पुलिस की गश्त सिर्फ कागजों तक सीमित है? या फिर यह पूरा खेल अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है? जब सड़कों पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही हों, तो प्रशासन की चुप्पी खुद कई सवाल खड़े करती है।
✍️ “अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर कोई बड़ा हादसा ही इसकी कीमत तय करेगा…”









