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ब्रेकिंग न्यूज़ : मौत का हाईवे बना सितारगंज–रुद्रपुर मार्ग, रात में बेलगाम दौड़ते ओवरहाइट भूसी ट्रक

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बलदेव सिंह: भ्रष्टाचार का तहलका न्यूज़। सितारगंज से रुद्रपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों आम जनता के लिए सुविधा नहीं बल्कि ख़तरे का सबब बनता जा रहा है। हर रात इस मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में ओवरहाइट और ओवरलोड भूसी से भरे ट्रक तेज़ रफ्तार से दौड़ते नजर आते हैं। अंधेरे में ये भारी वाहन चलती-फिरती मौत साबित हो रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग की ओर से इन पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रात होते ही हाईवे पर भूसी लदे ट्रकों की कतार लग जाती है। इन ट्रकों की ऊंचाई तय मानकों से कहीं अधिक होती है। न तो इनमें सुरक्षा के लिए रिफ्लेक्टर लगे होते हैं और न ही पीछे चेतावनी संकेत। ऐसे में बाइक सवार, कार चालक और पैदल राहगीर हर पल दुर्घटना की आशंका में रहते हैं।

रात में ही क्यों निकलते हैं ओवरहाइट ट्रक

हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों और आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि दिन में इन ट्रकों की आवाजाही बेहद कम होती है, जबकि रात होते ही इनकी संख्या कई गुना बढ़ जाती है। लोगों का आरोप है कि यह सब जानबूझकर किया जाता है ताकि चेकिंग से बचा जा सके। सवाल उठता है कि यदि नियमों का पालन हो रहा है तो ट्रक चालक रात का ही इंतज़ार क्यों करते हैं?

ऊधम सिंह नगर में परिवहन विभाग की भूमिका सवालों में

स्थानीय जनता का सीधा आरोप है कि आरटीओ विभाग के कुछ अधिकारियों और ट्रक स्वामियों के बीच सांठगांठ के चलते ओवरहाइट और ओवरलोड ट्रकों को खुली छूट मिली हुई है। नियमों के अनुसार, तय ऊंचाई और वजन से अधिक लदे वाहनों पर चालान और जब्ती की कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है। छोटे वाहनों पर कागज़ों की मामूली कमी पर चालान काटने वाला विभाग, इन भारी वाहनों के मामले में मौन साधे हुए है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दुर्घटनाओं की आशंका, लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं

हाईवे से सटे गांवों के लोग बताते हैं कि कई बार बड़े हादसे होते-होते बचे हैं। रात के अंधेरे में अचानक सामने आ जाने वाला ओवरहाइट ट्रक किसी भी वाहन को चपेट में ले सकता है। इसके बावजूद न तो पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग दिखती है और न ही परिवहन विभाग की संयुक्त चेकिंग।

अब आम जनता यह सवाल पूछ रही है कि—क्या ओवरहाइट भूसी ट्रकों के लिए अलग नियम हैं?

आखिर कब तक यह हाईवे मौत का रास्ता बना रहेगा?
क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा?
जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता और कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक सितारगंज–रुद्रपुर हाईवे पर रात का सफर लोगों के लिए डर का पर्याय बना रहेगा।

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